राजस्थान कांग्रेस में बढ़ रही खींचतान? क्या शांति धारीवाल का बयान आलाकमान को संदेश है
जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी सियासत एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। कोटा में वरिष्ठ कांग्रेस नेता शांति धारीवाल के उस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि "राजस्थान कांग्रेस का आलाकमान तो अशोक गहलोत ही हैं।"
यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के संगठनात्मक कार्यों की सराहना की है। पुष्कर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि "डोटासरा जी, आप अच्छा काम कर रहे हैं, दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण हैं।" इसे संगठन के प्रति उनके विश्वास का स्पष्ट संदेश माना गया था।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या शांति धारीवाल का बयान केवल राजनीतिक समर्थन है या फिर यह कांग्रेस हाईकमान के संदेश से अलग एक राजनीतिक संकेत भी देता है? क्या यह प्रदेश संगठन के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने की कोशिश है, या फिर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का सार्वजनिक रूप है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रदेश में पार्टी का आधिकारिक नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के हाथ में होता है। पार्टी के संविधान और संगठनात्मक व्यवस्था के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ही संगठन का प्रमुख चेहरा होते हैं। ऐसे में यदि कार्यकर्ता और नए नेता यह तय ही नहीं कर पाएं कि प्रदेश में अंतिम संगठनात्मक नेतृत्व किसके पास है, तो इसका असर पार्टी के विस्तार और नए लोगों के जुड़ने पर पड़ सकता है।
कांग्रेस के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि यदि प्रदेश कार्यालय की बजाय राजनीतिक गतिविधियों और जॉइनिंग का केंद्र कहीं और बन जाए, तो इससे संगठनात्मक अनुशासन और स्पष्टता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
अब निगाहें कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर हैं कि वह इन राजनीतिक संकेतों को किस रूप में देखता है और राजस्थान में संगठनात्मक एकजुटता को लेकर आगे क्या संदेश देता है।